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यूट्यूब में पढ़ाई के मोटिवेशनल वीडियो होते हैं। मोटिवेशन से थोड़ी सफलता की संभावना लगती है लेकिन पढ़ाई में सफलता नहीं मिलती। ऐसा क्यों होता है, इसे देखते हैं। मूलतः यूट्यूब के वीडियो हम तभी देखते हैं जब हम पढ़ाई में असफल/ उदास/ फेल हो चुके होते हैं। इन वीडियो में हम यह भी देखते हैं कि दूसरे लोग भी फेल होते हैं और हमारे मन को सांत्वना और सहानुभूति मिलती है। फिर हम वीडियो से जुड़ जाते हैं। फिर पढ़ाई में होने वाली समस्या बताई जाती है और उसे परिभाषित किया जाता है, यह परिभाषा बहुत सतही और बिल्कुल सटीक नहीं होती। समस्या की गलत परिभाषा करने के बाद चार-पांच उपाय बताए जाते हैं। जैसे कि पोमोडोरो तकनीक, ध्यान भटकने न दें, फोकस करें, समय का प्रबंधन करें, छोटे लक्ष्य पूरे करने के बाद खुद को इनाम दें और डोपामिन प्राप्त करें आदि। ये उपाय सुनकर झूठी उम्मीद (False Hope) बनती है। लेकिन यदि समस्या की परिभाषा गलत है, तो उपाय भी गलत होंगे। ठीक इसी वजह से ये उपाय पढ़ाई के लिए उपयोगी नहीं होते, पढ़ाई में मन नहीं लगता, एकाग्रता नहीं होती और संकल्पना समझ में नहीं आती।प्रत्येक छात्र की पढ़ाई में समस्याएँ या बाधाएँ अलग-अलग होती हैं और सामान्य उपायों से यह समस्या हल नहीं हो सकती। इसलिए ऐसे मोटिवेशनल वीडियो सुनने से पढ़ाई में कभी सुधार नहीं होता। इसका उपाय यह है कि अपनी समस्या को पहचानें, समस्या का निदान करें, मिले हुए निदान की क्रॉस-चेक करें और व्यावहारिक समाधान खोजें। पढ़ाई मानसिक कार्य है, इसलिए यहाँ मानसिकता यानी Attitude/एटीट्यूड, पढ़ाई की समझ, पढ़ाई की सही पद्धति को समझना और पढ़ाई के रास्ते में आने वाली बाधाएँ पहचानना सभी चीज़ें करनी पड़ती हैं और इसके लिए अपनी पढ़ाई की सीखने की पद्धति Self-Study Learning Method ही उपयोगी साबित होती है।

Dr. sandeep kharat
Dr. Sandeep Kharat (MBBS), Self Learning Study Method Coach